घटना 5 अगस्त की देर रात की बताई जा रही है। किसी अज्ञात व्यक्ति या एजेंसी द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना अथवा प्रशासनिक स्वीकृति के यह डस्ट डंप कर दिया गया है।
बच्चों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर मंडराया खतरा
जिस स्थान पर यह डस्ट गिराया गया है, वह क्षेत्र बेहद संवेदनशील है:
शैक्षणिक संस्थान: ठीक पास में प्राथमिक शाला और दो आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं। हवा चलने पर डस्ट के कण उड़ने से मासूम बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बन सकता है।
जल स्रोत और आस्था स्थल: डस्ट डंपिंग स्थल के ठीक करीब नहर, दो प्रमुख तालाब और ग्रामीणों का पवित्र देव स्थल स्थित है। बारिश के मौसम में यह डस्ट बहकर तालाबों और नहर में समाहित हो सकता है, जिससे न केवल जल प्रदूषित होगा बल्कि देव स्थल की पवित्रता भी प्रभावित होगी।
प्रशासन और जनप्रतिनिधि अनजान
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस डस्ट डंपिंग के संबंध में न तो स्थानीय सरपंच को कोई जानकारी है और न ही गांव के किसी जनप्रतिनिधि को सूचित किया गया है। देर रात चुपके से डस्ट गिराए जाने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
क्या पर्यावरण विभाग करेगा कार्रवाई?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद ग्रामीणों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या पर्यावरण विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर तत्काल संज्ञान लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे, या फिर अधिकारियों की उदासीनता से ऐसे अवैध कार्यों को बढ़ावा मिलता रहेगा?
ग्रामीणों ने मांग की है कि इस स्थान से तुरंत डस्ट हटवाया जाए और बिना अनुमति डस्ट गिराने वाले अज्ञात व्यक्ति/संस्था की जांच कर उचित वैधानिक कार्रवाई की जाए।


